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रटने के बाद समझना भी है

जब आप किसी भी व्यक्ति से इन्शुरन्स के सिलसिले में बात करते है तो आपको दो तरह के लोग मिलते है एक वो जिसने इन्शुरन्स ले रखी होती है और दूसरे वो जो जिन्होंने इन्शुरन्स नहीं ले रखी होती और दोनों से बात शुरू करने अलग अलग तरीके होते है और अलग अलग प्रश्न होते है तो आइये जानते है किस कस्टमर से कैसे बात करते है

ग्राहक के प्रशनो के उत्तर से पहले आपके मन ये बाते अच्छी तरह से पक्की होनी चाहिए नहीं आप थक के हार मान जाओगे और दुनिया के सबसे बेहतरीन काम में नाकाम भी हो जाओगे अगर इनको मन मे बसा लिए तो इन्शुरेंस आपके लिए बच्चो का खेल हो जाएगा और आपको बड़ा मजा भी आएगा

हम इन्सुरेंस नहीं बेचते हम पब्लिक की जरूरत को पूरा करने वाली सरकारी गारंटी के साथ जो स्कीम मिलती है वो बेचते है हम मरने के बाद मिलने वाली रकम की बात न करके उसके जीते जी मिलने वाली सुवीधाओ व लाभों की बात करते है और पब्लिक को समझते है की पॉलिसी किन किन परिस्थितयो में उसके लिए लाभदायक रहेगी

पॉलिसी बेचने के लिए सबसे जरुरी है आपका खुद का आत्मविश्वास क्योकि जब आपको मना करते है तो आपको मना नहीं करते बल्कि अपने भविष्ये के लिए जोखिम पैदा करते है क्योकि पॉलिसी पूरी होने पर ना तो पैसा आपको मिलना है और ना ही उसकी पॉलिसी के नॉमिनी आप हो, इसलिए निश्चिन्त हो जाओ ग्राहक अपने आप आएगा बस उसके दिमाग मे होना चाहिए की आप इन्शुरेंस करते है और साथ के साथ ये भी आपका इन्शुरेंस करने का तरीका और सर्विस सबसे अलग और अच्छी है

पॉलिसी रोज बिकने की चीज नहीं है कोई भी इंसान जीवन में पॉलिसी 1/4/5 बार ही खरीदता है कुछ लोग आपके एक बार के कहने पर और कुछ लोग बार बार कहने पर पॉलिसी लेंगे लेकिन कुछ लोग आपके हजार बार कहने पर भी पॉलिसी नहीं लेंगे तो उदास होने की जरूरत नहीं है हो सकता है उनकी कोई व्यक्तिगत समस्या हो जैसे उनका कोई नजदीकी व्यक्ति, भाई, कोई रिश्तेदार पॉलिसी करता हो और उसका मन पॉलिसी उससे लेने का हो तो उदास होने की जरूरत नहीं है अपना खुद का प्रचार करते रहो LIC लोगो की जरूरत है जरूरत पड़ने पर लोग अपने आप ढूंढते हुए आएंगे